Canonical error क्या है

जब हमारे website पर canonical error आता है तो इसे solve करना बहुत जरूरी हो जाता है। क्योंकि इससे हमारे website के ranking पर असर पड़ता है। तो ईस पोस्ट मे हम जानेंगे कि canonical error क्या है, और इसे कैसे solve करें

Canonical error क्या है


 Canonical error क्या है

जब आपके website का कोई url open करता है तो आपकी website कई अलग अलग url से open हो जाती है। तो search engine के नजर में ये सभी url अलग अलग website है, अलग अलग domain है। ईसे canonical error कहते हैं।

Canonical url क्या है

जब हमारी website मे  एक ही page के कई अलग अलग url बन जाते हैं। और उन url में से किसी एक url को जिस url व्दारा favorite बताया जाता है उसे canonical URL कहते हैं।

Canonical tag क्या है

एक ही जैसे बहुत सारे चीजों के बिच में जो favourite है उसे Canonical कहते हैं। आपके website में कई बार एक ही content वाले बहुत सारे pages हो जाते हैं। और search engines चाहते हैं कि आप उन्हें बताएं कि इन सारे एक ही जैसे pages के बिच में कौनसा आपका favourite है। मतलब कि canonical है। 

तो आप सारे एक जैसे pages मे एक ही link element लगाते हैं जो कुछ इस तरह दिखाई देता है।


इसमें सबसे पहले आप link relettionship announce करते हैं फिर जो कि आपका canonical यानी कि preferred (favourite) page है उसका url देते हैं। इसे ही canonical tag कहते हैं।

Canonical tag को कैसे use करें 

Canonical tag को use करने का तरीका काफी आसान है। wordpress और बाकी सारे platefarm पर आपको की सारे plugin मिल जाएंगे।


अगर आप wordpress पर yoast plugin इस्तेमाल करते हैं तो आपको अपने page के adit window में जाना होगा और फिर bottom में yoast seo की settings तक scrall किजिए।


अब आपको सबसे last में advance section पर click करना होगा। और यहा पर आपको canonical URL enter करने का box मिलेगा। 

Enter करने के बाद update पर click करना होगा।


Blogger by default इस element को header में provide करता है तो blogger पे आपको कुछ करने की जरूरत नहीं है‌। HTML या custom coded में इस link element को head section में pest करना होता है।


Website में एक जैसे pages होने के क्या कारण है

Website में एक जैसे pages होने के 2 कारण हो सकते हैं।

1, Technical  2. Content 

1, Technical - जब आपका page एक ही होता है लेकिन उसे की अलग अलग url से open किया जा सकता है। जैसे आपका page है example.com/page तो उसे https'//example.com/page url से भी open किया जा सकता है। http://www.example.com/page url से भी open किया जा सकता है। और https://www.example.com/page url के साथ भी open किया जा सकता है। और इन सभी url के last में trailing forward / लगाकर भी open किया जा सकता है।

आपके एक ही page तक पहुंचने के इतने सारे urls है। हमारे लिए, आपके लिए ये url एक जैसे दिखाई देते होंगे। लेकिन search engines के लिए ये सब अलग अलग है। ये सारे url आपस में search engine result मैं space के लिए लड़ते हैं और फिर आपके page rank को divide करते हैं। इसलिए आपको search engine को canonical URL देकर preferred करना होता है।

2. Content - जब आप एक ही content को चाहे वो exact duplicate हो या near duplicate हो। एक से ज्यादा pages मे use करते हैं, तो best practice है कि आप search engine को खुद ही बता दें कि कौनसा url, कौनसा pages canonical है।

Canonical URL use करने का क्या फायदा है

जब आप अलग अलग pages पर canonical tag लगाते हैं और उन सब पर किसी एक page को canonical यानी कि preferred बताया गया है। तो search engine कौन आप बता रहे हैं कि इन सारे pages को मिलने वाले rank signal को combine करके इस एक ही page को देना चाहिए।

Canonical tag आपकी link की equility, link signal, link juice जो भी word आपको अच्छा लगता हो उसे combine करने का काम करता है।


Canonical से releted कुछ important points क्या है

Canonical से releted कुछ important points जिन्हें जानना बहुत जरूरी है।

1. Canonical tag hint होता है। Instruction नहीं होता है। अगर आपने page पर canonical tag को use किया है। और search engine को बता रहे हैं कि मुझे https उसके बाद www वाला url search result में दिखाना है। यही मेरा preferred version है। 

लेकिन फिर भी search engine  आपके canonical को ignore करके किसी ओर version को दिखा रहे हैं तो आपकी mistake नहीं है। आपके किसी एक page को canonical बनाने का मतलब ये नहीं है कि आपके बाकी urls को search engine को scrall नहीं करेंगे।

Search engine बाकी सारे pages को scrall भी करेंगे और हो सकता है कि वो आपके बनाएं हुए preferred version को आपके canonical page को ignore करके किसी ओर page को दिखाने लगे।

इसका मतलब ये नहीं है कि आपके setup में कोई problem है या कोई solution ढुंढने की जरूरत है। Canonical एक hint है। और search engine के उपर depend करता है कि वो इसे मानते हैं कि नहीं मानते हैं।

2. Canonical tag 301 redirect से defferent होता है। इन दोनों के बिच में 1% भी confusion नहीं होना चाहिए। 301 एक http respond code है जौ server से browser को मिलता है। जो  browser को ये बताता है कि इस uri पर जो भी assest या content था वो अब एक दूसरे url पर parmanently move हो चुका है।

Canonical के सारे pages alive रहते हैं। लौ हटते नहीं है। और search engine को बताना होता है कि कौनसा page preferred है, canonical है।

3. Canonical tag को cross domain भी use किया जा सकता है। अगर आपका एक ही content दो अलग अलग domain पर हैं तो आप एक domain के page को canonical set कर सकते हैं। जिससे आपके दोनो website को मिलने वाले ranking signal combine रहेंगे।

4. Self referencing canonical tags भी use किए जा सकते हैं। मतलब आपके website पर तिन pages है x, y, z और तिनों में same content है। तो आप x को canonical बनाना चाहते हैं, आप y पर link element जोड़ते हैं कि x canonical है। Z पर भी link जोड़ते हैं कि x canonical है। 

लेकिन इसके साथ ही आपको x पर भी  Link element को जोड़ना होगा कि x canonical है। जिससे कोई confusion ना हो। 

5. Canonical tags काफी बार href lang tage के साथ mix हो जाते हैं। क्योंकि अगर आप जल्दबाजी में देखें तो दोनों एक ही जैसे दिखाई देते हैं। पर दोनो में काफी बड़ा difference है।

 href lang tage search engine को बताता है कि कौनसा page कौनसी country या कौनसे language के लिए best है। और canonical बताता है कि page बाकी सारे pages के बिच में best है। चाहे आपकी language कुछ भी हो।

तो आप अलग अलग language के pages पर canonical tag को set करते हैं तो हमेशा ध्यान रखिए कि एक language के page को दुसरे language के page पर canonical नहीं देना है। Example के लिए अगर आपकी website पर दो page है, example.com/english और example.com/hindi तो आप english के page पर इस तरह के tag को use करेंगे।


जिस language का page है उसी language में canonical किया जाएंगा। वरना search engine को mix matches मिलेंगे। 

निष्कर्ष

मुझे उम्मीद है कि canonical tag क्या है और canonical tag कैसे use करें ये आपके समझ में आ गया होंगा। अगर आपको ये post अच्छी लगी है तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे।



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