आपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में जरूर सुना होगा। और आजकल तो हम सभी स्मार्टफोन में गुगल मेंप और गुगल असिस्टेंट जैसे सोफ्टवेयर के रूप में इसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं। इस पुरे ब्रम्हांड में मनुष्य ही एक एक ऐसा जीव है जिसे ईश्वर ने दिमाग देने के साथ उसे सही तरीके से उपयोग करने की कुशलता भी प्रदान की है। मनुष्य अपनी बुद्धि और कुशलता से आज कहा कहा पहुंच गया है। अपने इस बुद्धि के बल पर इंसानों ने कम्प्यूटर , इंटरनेट , स्मार्टफोन जैसे ओर हशभी कि सारे अविष्कार किए है। जिसकी वजह से हम मनुष्य की जिंदगी को एक नई दिशा मिली है।
टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इंसान ने इतना विकास कर लिया है कि अब उसी की तरह सोचने समझने और अपने दिमाग का इस्तेमाल करने वाला एक चलता फिरता मशीन तैयार कर रहा है जो बिल्कुल इंसान की तरह ही काम करने की क्षमता रख सकता है। उस एडवांस टेक्नोलॉजी से बनी मशीन को ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहा जाता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होता क्या है
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिसे हिंदी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता कहा जाता है। कृत्रिम का मतलब है किसी व्यक्ति के द्वारा बनाया हुआ और बुद्धिमत्ता का मतलब है इंटेलिजेंस यानी सोचने की शक्ति। ए आई कंम्पयूटर विज्ञान की एक शाखा है जो ऐसे मशीन को विकसित कर रही है जो इंसान की तरह सोच सके और कार्य कर सकें। जब हम किसी कम्प्यूटर को इस तरह तैयार करते हैं की वह मनुष्य की अक्लमंदी की तरह कार्य कर सकें तो उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहतै है।
अर्थात जब हम किसी मशीन में इस तरह के प्रोग्राम सेट करते हैं कि वो एक मनुष्य कुछ भांती कार्य कर सकें , उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहा जाता है। ये जो इंटेलिजेंस की ताकत होती है ये हम मनुष्य के अंदर अपने आप ही बढ़ती है। कुछ देखकर कुछ सुनकर कुछ छुकरं की हम ये सोच सकते हैं कि उस चीज के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। ठिक उसी तरह से कम्प्यूटर यंत्र के अंदर भी एक तरह का इंटेलिजेंस डेवलप कराया जाता है। जिसके जरिए कम्प्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है। जो उन्हीं तर्कों के आधार पर चलता है जिसके आधार पर मानव मस्तिष्क काम करता है।
कम्प्यूटर साइंस के वैज्ञानिकों ने एक आई की परीकल्पना दुनिया के सामने रखी थी । जिसमें उन्होंने बताया था की एक आई काॕंसेप्ट के द्वारा एक ऐसा कम्प्यूटर कन्ट्रोल्ड मशीन , एक ऐसा सोफ्टवेयर बनाये जाने की योजना बनाई जा रही है जो वैसा ही सोच सके जैसे इंसान का दिमाग सोचता है। मानव सोचने , एनालाइज करने और याद रखने का काम भी अपने दिमाग की जगह पर यंत्र कम्प्यूटर से कराना चाहता है। इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रगति पर जोर दिया जा रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैसे काम करता है
कम्प्यूटर साइंस में एक आई को मशीन लर्निंग के नाम से भी जाना जाता है। मशीन लर्निंग ए आई का हिस्सा है। इस तकनीक का सपोर्ट हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों में किया जाता है , ताकि एल्गोरिथम को आसानी से समझा जा सके। ये सिस्टम को अपने अनुभव से , अपने आप हि सिखने और खुद को इम्प्रूव करने की क्षमता देता है और इसमें प्राथमिक महत्व कम्प्यूटर को खुद से इंसान के बिना ही सिखने की अनुमति देना होता है। मशीन लर्निंग कम्प्यूटर प्रोग्राम के डेवलपमेंट पर फोकस करता है जो डेटा को एक्सेस कर सकें और उसमें अपने आप सिख सके । जिस तरह मनुष्य अपने अनुभव से अपने क्षमता को बेहतर करते हैं , ठीक उसी तरह एक आई के प्रोग्राम है । जिसके जरिए मशीन भी सिखने का काम कर सकती है।
जाई किसी भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का पर्याय नहीं है। एआई तीन तरिके से काम करता है।
1. लर्निंग प्रोसेस - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा प्राप्त करने और उसे योग्य जानकारी में बदलने के लिए नियम बनाने पर केन्द्रित है। इन्हें एल्गोरिथम कहा जाता है। ये एल्गोरिथम कंम्पयूटर सिस्टम को कार्य पुरा करने में मदद करते हैं।
2. रिजनिंग प्रोसेस - इस स्किल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वांछित परिणाम तक पहुंचने के लिए एल्गोरिथम का चुनाव करती है।
3. सेल्फ कलेक्शन प्रोसेस - इस स्किल के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिथम को अपने आप ठीक करती है ताकि युजर को सटिक परिणाम मिल सके।
मशीन लर्निंग क्या है
मशीन लर्निंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक भाग है जो कि सिस्टम को ये काबिलियत प्रदान करता है की वो आॕटोमेटिकली सिख सके और जरुरत पड़ने पर खुद को बेहतर बना सके। मशीन लर्निंग स्पष्ट रूप से प्रोग्राम के लिए सिस्टम को आॕटोमेटिकली लर्न करना सिखा सकती है। इसमें सिस्टम को कार्य करने के लिए इतना कुशल बना दिया जाता है कि मशीन अगली बार से अपने पिछले अनुभव के आधार पर खुद ही उस कार्य को पूरा कर सकें और लगातार उसमें सुधार कर सकें। जैसे की हम इंसान करते हैं, हम अपने अच्छे बुरे सभु अनुभवों से कुछ ना कुछ सिखाते हैं और भविष्य में उस अनुभव के आधार पर ही कोई कार्य करते हैं।
मशीन लर्निंग के पिछे का कांसेप्ट इसी आधार पर बना है यानी किसी एक विशेष कंम्पयूटर या मशीन को इस तरह से प्रोग्राम किया जाता है कि वो युजर को मनमुताबिक काम कर सके साथ ही युजर के कमांडर और उससे जुड़े डेटा को भी स्टोर करके रख सके। मशीन लर्निंग कंप्यूटर प्रोग्राम के विकास पर फोकस करता है जो कि डेटा को खुद ही एक्सेस कर सके और बाद में उसे खुद के लर्निंग के लिए इस्तेमाल कर सकें। मशीन की सिखने की प्रक्रिया डेटा या आब्जर्वेशन से शुरू होती है जिसमें डायरेक्ट एक्सपिरियंस या डायरेक्शन के जरिए मशीन प्राप्त डेटा में बेटर की तलाश कर सकें और भविष्य में मनुष्यो के द्वारा दिए गए उदाहरणों के आधार पर बेहतर निर्णय ले सकें ।
मशीन लर्निंग बनाने के पिछे का मुख्य उद्देश्य रही है की कंम्पयूटर बिना किसी इंसान की सहायता से अपने आप ही सिख सके और उसके अनुसार ही कार्य को अंजाम दे। आसान भाषा में कहें तो मनुष्य अपने तरह ही सोचने वाली बनाना चाहता है।
मशीन लर्निंग कैसे किया जाता है
मशीन लर्निंग कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( एआई ) का एक रुप है जो की कंम्पयूटर को इंसानो के समान सोचने के तरीके के बारे में सोचना सिखाता है , जैसे पिछले अनुभवो से सिखना और सुधारना । ये डेटा की खोज , पेटर्न की पहचान करके काम करता है और इसमें कम से कम ह्यूमन इंटराइजेशन शामिल होता है। मशीन लर्निंग को इतना मुल्यवान बनाने का एक बड़ा हिस्सा ये पता लगाने की क्षमता है की ये डैटा को रीड या कलेक्ट करते समय मानव की नजरों से क्या छुट गया है। मशीन लर्निंग माॕडल वो जटिल पेटर्न को पकड़ने सक्षम है जो ह्यूमन एनालिसिस के दौरान अनदेखा किया जाता है।
मशीन लर्निंग कितने प्रकार का होता है
मशीन लर्निंग के काम करने के तरीके को समझने के लिए इसके प्रकार को समझना बहुत जरूरी है। सामान्य रूप से मशीन लर्निंग एल्गोरिथम चार प्रकार के होते है । 1. सुपरवाइज्ड लर्निंग । 2. अनसुपरवाइज्ड लर्निंग 3. सेमीसुपरवाइज्ड लर्निंग । 4. रेन्फोर्समेंट मशीन लर्निंग।
1. सुपरवाइज्ड मशीन लर्निंग - इस प्रकार के अल्गोरिदम में मशीन ने पिछले अनुभवो से जो सिखा हुआ होता है उसे ये ने डेटा में लागु करता है , ताकि वो पहले से दिए गए उदाहरण का इस्तेमाल करके भविष्य में होने वाले घटनाओं का अनुमान लगा सके। ये एल्गोरिथम ठीक उसी तरह से काम करता है जिस तरह से मनुष्य वास्तव में अपने अनुभव से सिखते है। सुपरवाइज्ड लर्निंग में मशीन को इनपुट कै तौर पर विभिन्न प्रकार के उदाहरण तथा जवाब दिए जाते हैं। जिससे ये एल्गोरिथम इन उदाहरणों से सिखती है और इन इनपुट्स के आधार पर सही आउटपुट का अनुमान लगाती हैं।
2. अनसुपरवाइज्ड मशीन लर्निंग - अनसुपरवाइज्ड मशीन लर्निंग अल्गोरिदम के विपरित इसमें इनपुट कै रुप में उदाहरण और जवाब पहले से नहीं दिए जाते। इसमें एल्गोरिथम को खुद ही डेटा के आधार पर अनुमान लगाना होता है। इसलिए ये एल्गोरिथम टेस्ट डेटा या रियल डेटा से सिखते है जिन्हें पहले लेबल्ड क्लासीफाइड या कैटेगराइज्ड नहीं किया गया है। अनसुपरवाइज्ड लर्निंग एल्गोरिथम डेटा में समानताओं की पहचान करता है और डेटा के प्रत्येक ने तुकडे में ऐसे सामान्यताओं की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर आउटपुट देना होता है।
3. सेमीसुपरवाइज्ड लर्निंग - ये एल्गोरिथम दोनो सुपरवाइज्ड और अनसुपरवाइज्ड लर्निंग के बिच में आता है। क्योंकि प्रशिक्षण के लिए ये दोनो लेबल्ड , अनलेबल्ड डेटा का इस्तेमाल करता है। वो सिस्टम जो इस एल्गोरिथम मेथड का इस्तेमाल करता है वो बड़ी ही आसानी से अपनी लर्निंग एबिलिटी को समय समय पर काफी सुधार करने में सक्षम होता है।
4. रेन्सफोर्मेन्ट लर्निंग - रेन्सफोर्मेन्ट मशीन लर्निंग एक सिखने की विधि है जो क्रियाओ को प्रस्तुत करके अपने आसपास के वातावरण से बातचीत करता है और साथ ही एरर को भी डिस्कवर करता है। ट्रायल एन एरर को खोज निकालना और उनके बारे में पता लगाना इनकी खासियत है। ये मेथड मशीन और सोफ्टवेयर एजेड को किसी भी विशेष गती विधि का खुद से पता लगाने में मदद करता है , जिससे ये सिस्टम की परफॉर्मेंस को ओर बेहतर बना सके।
मशीन लर्निंग के उपयोग
मशीन लर्निंग का उपयोग करके गुगल बहुत सी नई चीजे कर रहा है , जैसे गुगल ट्रान्सलेटर , सड़क पर लगे संकेत बोर्ड या किसी भाषा में लिखी मेन्यू की फोटो लेकर उसमें मौजूद शब्दों और भाषा का पता लगाता है और उसका आपकी भाषा में उसी समय ट्रान्सलेटर कर देता है। ये असल में मशीन लर्निंग एल्गोरिथम का ही कमाल है। इसकै साथ आप गूगल ट्रांसलेटर से कुछ भी बोल सकते हैं और मशीन लर्निंग के जरिए काम करने वाली स्पीच यानी बोली को पहचानने वाली तकनीक अपना काम शुरू कर देंगी। स्पीच रेकीग्नेशंन तकनीक का इस्तेमाल गुगल कै ओर भी प्रोडक्ट में होता है जैसे गुगल एप्प में आप अपने वाॕइस से कुछ भी सवाल कर सकते हैं और युटुब में भी आप मनचाही विडियो को लिखकर सर्च करने के अलावा बोलकर भी सर्च कर सकते हैं।
मशीन लर्निंग का इस्तेमाल ओर भी कई जगह पर किया जा रहा है , जोसे की फेसबुक, शाॕपींग वेबसाइट, ईमेल इत्यादि। दुनिया भर में फेसबुक का इस्तेमाल काफी बड़ी मात्रा में किया जाता है और मशीन लर्निंग का उपयोग फेसबुक में आॕटोमेटिक फ्रेंड टेकींग सजेशन में किया जाता है। इसमें टेक्स्ट डिटेक्शन और इमेज रेकिग्नेशन के आधार पर फेसबुक अपने डेटाबेस में चेक करता है और किसी फोटो या इमैज को पहचानता है ।
जब आप आॕनलाइन शाॕपींग करते हैं तो आपने देखा होगा कि आपके सर्च कीए गए प्रोडक्ट से जुड़ी जानकारी आपको हर जगह दिखाई देने लगती है। जैसे आपने अमेजन पर कुछ सर्च किया है और कुछ देर बाद आप फेसबुक या युटुब खोलेंगे तो वहां भी आपको उसी प्रोडक्ट से जुड़े विज्ञापन दिखने लगते हैं। तो ये सब असल में मशीन लर्निंग की वजह से दिखाई देता है। जिसमें गुगल आपके हर गतिविधि पर नजर रखता है। और उसी के अनुरूप विज्ञापन दिखाता है ।
ठीक इसी तरह ईमेल इस्तेमाल करते समय आपने देखा होगा कि कैसे सिर्फ हमारे जरुरत की ईमेल इनबॉक्स में आती है और अधिकतर मेल स्पर्म मेल वाले फोल्डर में चली जाती है ,तो इसके पीछे भी मशीन लर्निंग इस्तेमाल होती रही है । जिसमें मशीन लर्निंग द्वारा आॕटोमैटिकली किसी ईमेल का कान्टैक्ट और सोर्स डीटेक्ट कर लिया जाता है और कुछ ग़लत पाए जाने पर ईमेल को स्पर्म कर लिया जाता है।
मशीन लर्निंग का महत्व
इससे इंसान की जिंदगी का काफी आसान हो गई है। जहां मशीन लर्निंग का इस्तेमाल हर क्षेत्र में कार्यो को बेहतर करने के लिए किया जा रहा है और इसके लिए लगातार मशीनो को ओर भी प्रभावी और कुशल बनाया जा रहा है। मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि इस तकनीक का फायदा लगभग हर क्षेत्र में हो रहा है। जैसे रीटेल में जहां ट्रेड को आसानी से समझा जा सकता है और भविष्य में होने वाली सेल की अनुमान लगाया जा सकता है। साथ ही ग्राहकों के ब्राउजिंग बिहेवियर को समझकर प्रोडक्ट उनके मेल पर सुझाए जा सकते हैं। जिससे कस्टमर इक्सपिरियंस बढ़ सके और उसके सेल में वृद्धि हो पाए।
फाइनेंस सेक्टर में भी मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कस्टमर को बेहतर और तेज सर्विस उपलब्ध कराई जा रही है। जैसे लेनदेन , सुरक्षा बढ़ाना और फ्रोड गतिविधि पर रोक लगाना ।
हेल्थकेयर इंडस्ट्री में भी मशीन लर्निंग बहुत तेजी है कार्य कर रही है। मशीन लर्निंग की सहायता से मनुष्य के शारीरिक गतिविधि द्वारा उनके बिमारी का पता लगाने में मदद मिलती है। साथ ही इसे काफी कम खर्च में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा मिलता है।
गुगल और फेसबुक में भी मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से युजर को उचित विज्ञापन दिखाते हैं। ये सभी विज्ञापन युजर के पास सर्च बिहेवियर पर आधारित होते हैं। इसलिए इसे टार्गेट एड्स भी कहा जाता है।
इसके अलावा मशीन लर्निंग का उपयोग आॕनलाईन धोखाधड़ी को पकड़ने स्पेम फिल्टर करने , थ्रेट रोकने और नेटवर्क क्षेत्र भी किया जाता है। इसी प्रकार ऐसे बहुत से क्षेत्र है जहां मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया जा रहा है और ऐसे बहुत से क्षेत्र भी है। जहां पर इसके लिए रिसर्च किया जा रहा है , कि ये कैसे हमारे लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। भविष्य में मशीन लर्निंग का इस्तेमाल बहुत सी चीजों में कीए जाने की संभावना है। जिसमें एक आई की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कितने प्रकार की होती है
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चार प्रकार की होती है
1. रिएक्टिव मशीन - यह सबसे पुरानी मशीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की फोर्म है। ये मशीन पुराने डेटा को संग्रहित करने में सक्षम नहीं होती और निर्णय लेने के लिए पिछले अनुभव का इस्तेमाल भी नहीं करती है । यह लिमिटेड डेटा स्टोर करके प्रतिक्रिया देती है। उदाहरण के तौर पर आई बी एम ने 1997 में शतरंज खेलने वाले सुपर कंप्यूटर डेवब्लु जिससे उस समय के मशहूर शतरंज खिलाड़ी गेरी कास्पेरोव को हराया था। इस सुपर कंप्यूटर ने मेमोरी को स्टोर करने की सुविधा नहीं दी गई थी। डेबब्लु ने विरोधी की तमाम चाल को देखते हुए खेला था।
2. लिमिटेड मेमोरी - इस फोर्म की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पिछले समय का डेटा स्टोर करती है और पुराने डेटा का इस्तेमाल करके भविष्य में होने वाले गतिविधी के बारे में बताती है। दिलचस्प बात ये है कि यह प्रणाली खुद सिखने और फैसला लेने में सक्षम है।
3. थ्योरी आफ माइंड - इस प्रकार की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीनों द्वारा मानव मस्तिष्क की सीमा तक पहुंच गई है। इस समय कई मशीनों वाइस असिस्टेंट के तौर पर काम कर रही है। फिलहाल इस पर काम चल रहा है।
4. सेल्फ काॕन्सियस - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस प्रकार पर काम चल रहा है यानी सेल्फ काॕन्सियस पर अभी काम चल रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रणाली के आने से रोबोट्स इंसानों की तरह यह जान सकेंगे की उनका वजूद क्या है। इसके बाद इंसानों और मशीनो में कोई अंतर नहीं रह जाएंगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजस की शुरुआत किसने की
जब इंसान कम्प्यूटर सिस्टम की असली ताकत की खोज कर रहा था तब मनुष्य के दिमाग में उन्हें ये सोचने पर मजबुर किया कि क्या एक मशीन भी इंसानो की तरह सोच सकती है। इसी सवाल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास की शुरुआत हुई। 1995 में सबसे पहले जाॕन मैकार्थी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द का इस्तेमाल किया । वो एक अमेरिकन कम्प्यूटर साइंटिस्ट थे , जिन्होंने सबसे पहले इस टेक्नोलॉजी के बारे में सन् 1956 में एक कान्फ्रेंस में बताया था। इसलिए उन्हें फादर ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी कहा जाता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोई नया विषय नहीं है। दशकों से दुनिया भर में इस पर चर्चा होती रही है। मेट्रिक्स , रोबोट , टर्मिनेटर, रेड रनर जैसे फिल्मो का आधार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ही है। जहां रोबोट का स्वरूप दिखाया गया की कैसे वो इंसानों की तरह सोचता है और कार्य करता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का क्या उद्देश्य है
इसके पिछे सिर्फ एक ही उद्देश्य था की एक ऐसा बुद्धिमान मशीन की संरचना की जाए जो की इंसानो की तरह ही बुद्धिमान हो और उनकी तरह ही सोचने , समझने और सिखने की क्षमता रखता हो।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कहा किया जाता है
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बिजनेस , शिक्षा , स्वास्थ्य देखभाल , बैंकिंग , फाइनेंस , कृषि और आॕटोनोमस व्हिकल में होता है। इंटेलिजेंस की लोकप्रियता बढे ही जोरों शोरों से बढ़ती चली जा रही है और आज ये एक ऐसा विषय बन गया है जिसकी टेक्नोलॉजी और बिजनेस के क्षेत्रों में काफी चर्चा हो रही है। कि विशेषज्ञो और एनालिसिस का मानना है की एक आई या मशीन लर्निंग हमारा भविष्य है। लेकिन अगर हम अपने चारों तरफ देखे तो हम पाएंगे कि ये हमारा भविष्य नहीं बल्कि वर्तमान है। टेक्नोलॉजी के विकास के साथ आज हम किसी ना किसी तरीके से एक आई से जुड़े हुए हैं और इसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं।
हाल ही में कि कम्पनीयो ने मशीन लर्निंग पर काफी निवेश किया है। इसके कारण कइ प्रोड्क्ट्स और एप्स हमारे लिए उपलब्ध हुए हैं। चलिए अभी के समय में उपलब्ध होने वाले कुछ एक आई के उदाहरण देखते हैं।
1. आपने एप्पल फोन तो देखा ही होंगा इसकी सबसे लोकप्रिय पर्सनल असिस्टेंट सीरी के बारे में सुना होगा। सीरी ए आई का सबसे बेहतरीन उदाहरण है । इससे आप वो सारी चीजें करवा सकते हैं जो आप पहले इंटरनेट में ट्राय किया करते थे , जैसे मेसेज सेंड करना, इंटरनेट से इन्फोर्मेशन ढुंढना , कोई एप्लिकेशन आॕपन करना , टाइमर सेट करना , अलार्म लगाना इत्यादि जैसे काम आप मोबाइल को बिना हाथ लगाए सीरी से ' हे सीरी ' कहकर करवा सकते हैं। सीरी आपकी भाषा और सवालों को समझने के लिए मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का उपयोग करती है। हालांकि ये सिर्फ आइफोन और आइपेड मे ही उपलब्ध है। इसी तरह एलेक्सा डिवाइस , विन्डोज का गोटाना और एन्ड्राएड फोन की पर्सनल असिस्टेंट गुगल असिस्टेंट है , जो की सीरी की तरह काम करने के लिए प्रयोग किये जाते हैं।
2. गुगल अपने कि क्षेत्रो में एक आई का इस्तेमाल करता है। लेकिन गुगल मेप मेप में एक आई टेक्नोलॉजी का अच्छा इस्तेमाल हुआ है। गुगल मेप हमारे लोकेशन को ट्रेक करती हैं और हमें सही रास्ता बताने के लिए एक आई एबल मेपिंग का भी इस्तेमाल करती हैं और हमें सही रुट बताने में मदद करती है।
3. लोकप्रिय इस - कामर्स वेबसाइट अमेजन ने भी एक ऐसा रेवोल्यूशनरी प्रोडक्ट लांच किया है जिसका नाम है इको , ये आपके सवालों का जवाब दे सकता है, आपके लिए आॕडियो बुक पढ़ सकता है , आपका ट्रेफिक का हाल और वेदर रिपोर्ट बना सकता है , किसी भी स्पोर्ट का स्कोर और शेड्यूल भी बता सकता है।
4., ए आई का इस्तेमाल सिर्फ स्मार्टफोन मे नही बल्कि आॕटोमोबाइल् के क्षेत्र भी इसका बहुत ज्यादा उपयोग किया जा रहा है। अगर आप कार पसंद करते हैं तो आपको टेस्ला कार की जानकारी जरुर होंगी। ये कार अभी तक उपलब्ध सबसे बेहतरीन आॕटोमोबाइल्स मे से एक है। टेस्ला कार से जुड़ने के बाद इसमें सेल्फ ड्राइविंग जैसे फिचर्ड उपलब्ध है। ऐसे ही ना जानी कितनी सेल्फ ड्राइविंग कार और बन रही है जौ आने वाले वक्त में भी और स्मार्ट हो जाएंगी।
5. ए आई का इस्तेमाल मेन्युफेक्चरिंग इंडस्ट्री में भी खुब जोरो से हो रहा है। पहले जिस काम को करने के लिए सेकडो लोग लगते थे वहीं आज मशीन की मदद से वही काम बहुत जल्दी और बेहतर किया जा रहा है।
6. हमें विडियो गेम्स में भी एक आई की झलक मिलती है। जैसे कि सारी गेम्स में आपको कंप्यूटर से खेलना होता है , जैसे चेस और लुडो। इसके अलावा एक आई का इस्तेमाल स्पिच रेकिग्नेशन , कम्प्यूटर विजन , रोबोटिक्स फाइनेंस , वेदर फोरकास्टिंग, हेल्थ इण्डस्ट्री और एविएशन में भी होता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की विशेषताएं
1. डिप लर्निंग - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मशीन इंसान से सिखती है। अगर उन्हें कुछ बताया जाता है , कुछ इन्फोर्मेशन दी जाती है तो वो स्टोर करके उसको नई नई चीजों को डिस्कवर करती है।
2. फेस रिकग्निशन - आजकल जो कइ सारी मशीन आई है उससे हम फेस रिकग्नाइज करते हैं और अपनै कॕमरै कौन अनलाक करने के लिए फेस का इस्तेमाल करते हैं। तो ये फेस रिकग्नाइज एक एआई है।
3. आॕटोमेटेड सिंपल एण्ड रिपीटेटीव टास्क - मशीन किसी काम को लगातार करती है बिना किसी फेटिग के और बिना बोर हुए।
4. डेटा इग्नेशन - बहुत सारा डेटा कंपनी , आर्गनाइजेशन , कार्पोरेशन में आता रहता है तो डेटा हर दिन बढ़ रहा है। डेटा रिकग्निशन न सिर्फ डेटा को एनालाइज करता है बल्कि गेदर भी करता है।
5. चाट बोक्स - आजकल के एआई है वो कस्टमर के प्रोब्लम को टेक्स्ट और आडियो के द्वारा सोल्व करते हैं ।
6. काॕटम कंम्युटिंग - एआई में काॕटम कंम्युटिंग बहुत ज्यादा क्वांटम फिजिक्स को एक्युरेसी के साथ सोल्व करने में हमारी मदद करती है।
7. क्लाउड कंम्युटिंग - हर दिन बड़ी मात्रा में डेटा आ रहा है इसको फिजीकल फोर्म में स्टोर करना पाॕसीबल नहीं है। इसके लिए क्लाउड स्टोरेज का इस्तेमाल करते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के फायदे
1. ए आई एरर को कम करने में हमारी मदद करता है और अधिक एक्योरेसी के साथ डेटा हासिल करने की संभावना बढ़ जाती है।
2. ये आई का उपयोग करने से तेज़ी से निर्णय लेने और जल्दी से कार्य करने में सहायता मिलती है।
3. मनुष्यो के विपरित मशीनों को लगातार आराम और रिफ्रेशमेंट की आवश्यकता नहीं होती , वो लम्बे समय तक काम करने के काबिल होतै है और ना तो उबते हैं ना तो विचलित होते हैं और ना ही थकते हैं।
4. ए आई की मदद से संचार , रक्षा स्वास्थ्य , आपदा प्रबंधन और कृषि आदि क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आ सकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नुक़सान
1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लाभ अभी बहुत स्पष्ट नहीं है लेकिन इसके खतरों को लेकर कहा जा सकता है की एक आई के आने से नूकसान मनुष्य का ही होंगा।
2. ए आई मनुष्य के स्थान पर काम करेंगे और मशीनें स्वयं ही निर्णय लेने लगेंगी और उन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो इससे मनुष्य के लिए खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। ।
3. विशेषज्ञो का कहना है कि सोचने समझने वाले रोबोट अगर किसी कारण या परीस्तिथी में मनुष्य को अपना दुश्मन मानने लंगे तो मानवता के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के निर्माण के लिए भारी लागत की आवश्यकता होती है क्योंकि ये बहुत ही काम्प्लेक्स मशीन होती है। उनके मरम्मत और रखरखाव के लिए भारी लागत की आवश्यकता होती है।
5. इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक आई की सारे नौकरायो को मनुष्यों से छिन रही है जिससे भविष्य में बेरोज़गारी की समस्या ओर भी बढ़ने वाली है।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए कंम्पयूटर और मेल्स बहुत जरूरी है। इंन्जिनिरींग के बाद भी इसमें केरियर बनाया जा सकता है। कुछ जगह दाखिला लेने के लिए इंन्ट्रेंस इक्जाम पास करना पड़ता है। इसके अलावा कंम्पयूटर साइंस से ग्रेजुएट , बीटेक या एमटेक ग्रेजुएट , बीएससी आई टी या एम एस सी आई टी ग्रैजुएट, सोफ्टवेयर इंजीनियर , डेवलपर, बीसीए या एम सी ए ग्रेजुएट भी ये कोर्स कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कुछ कोर्सेस आपको बताते हैं जो सिर्फ एआई के लिए होते हैं। जैसे कि बेचलर इन ए आई, बीएसी मेथेमेटिक्स , कम्प्यूटर साइंस बेचलर इन ए आई, मास्टर आफ साइंस इन एआई , एम एस सी मेथेमेटिक्स मास्टर इन मशीन लर्निंग, मास्टर इन इंजीनियरिंग में ( एम ई ) , एम बी ए इन डेटा साइंस , एम एस इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग , पीएचडई इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , पीएचडी इन कंम्पयूटर साइंस, पीएचडी इन मेथेमेटिक्स ये कुछ कोर्सेस है जो विशेष रूप से आपको एआई ही पढ़ाएंगे।
भारत मेआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इंस्टीट्यूट
आइ आइ टी खड़कपुर, दिल्ली, मुंबई , दिल्ली, कानपुर, मद्रास, गुवाहाटी, रुड़की, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस , बेंगलुरु नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी नई दिल्ली, बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस ( बिट्स ) पिलानी ।
निष्कर्ष
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐसी तकनीक है और इसका इस्तेमाल भी बहुत से क्षेत्रों में अपने फायदे के लिए कर रहे हैं। लेकिन सच ये भी है की अगर इसके जोखिम से बचने का तरीका नहीं ढुंढा तो इसकै गंभीर परिणाम हो सकते हैं क्योंकि तमाम लाभों के बावजूद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अपने खतरे है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने से हमें जो सुविधा मिल रही है या आने वाले समय में इसका मनुष्य पर कैसा असर होने वाला है इसके बारे आप क्या साचते है अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बाताए।
आशा है कि आपको इस पोस्ट से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है, इसका उपयोग कहा होता है, इसके क्या फायदे हैं और इसके क्या नुक़सान है इसी जुड़ी सारी जानकारी मिल गई होंगी। मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की मेरे द्वारा लिखे गए पोस्ट से आपको पुरी जानकारी मिल सके ताकि आपको कहीं ओर जाना ना पढ़े। अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगे तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि बाकी लोगों तक भी ये जानकारी पहुंच सके।

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